शेखर जोशी की जीवनी | Shekhar Joshi Biography in Hindi

दोस्तों आज के इस नए आर्टिकल में हम आपको कथाकार शेखर जोशी की जीवनी देने जा रहे हैं, आप इसमें शेखर जोशी के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर पाएंगे।

 

 

 

 

शेखर जोशी हिंदी भाषा साहित्य के प्रख्यात लेखक है। इन्होने हिंदी भाषा साहित्य में बहुत योगदान दिया तथा अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के वंचित और अभावग्रस्त लोगो की समस्याओ को उकेरने का प्रयास किया। छठे दशक में हिंदी साहित्य और कहानियो का पूरे विश्व में महत्वपूर्ण समय चल रहा था।

 

 

 

 

उस समय कई युवा कहानी लेखकों ने अब तक चली आ रही कहानियो के विषय वस्तु न चलते हुए सामूहिक रूप से अलग रूप रंग की विषय वस्तुओ पर अपनी लेखनी चलाई।

 

 

 

 

 

 

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उन कहानीकार लेखकों में शेखर जोशी का प्रमुख स्थान था। युवा कहानी लेखकों का यह प्रयास देखते ही देखते कहानी विधा साहित्य का केंद्र बन गया तथा एक पूर्ण आंदोलन का रूप ग्रहण कर लिया।

 

 

 

 

उस आंदोलन को ‘नयी कहानी आंदोलन’ के नाम से ख्याति मिली थी। इस आंदोलन से निकलने वाली कई लेखक प्रतिभाओ में शेखर जोशी का महत्वपूर्ण स्थान है। शेखर जोशी ने जिन कहानियो को मूर्तरूप दिया वह सभी कहानियां ‘नयी कहानी आंदोलन’ के प्रगतिशील पक्ष की प्रतिनिधि है।

 

 

 

 

शेखर जोशी के कहानी लेखन में समाज में मेहनत करने वाले, सुविधाहीन वर्ग को उचित स्थान दिया गया है। शेखर जोशी ने अपनी लेखन कला में सहज और आडंबरहीन भाषा शैली के साथ सामाजिक विषय की यथार्थ स्थिति का आंकलन करते हुए बारीक़ से बारीक़ नुक्तों को पकड़कर अपनी लेखनी के माध्यम से प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया।

 

 

 

 

इनकी लेखन कला की विषय वस्तु आमजन में बहुत करीब होने से पूर्णरूप से सफल थी। शेखर जोशी के कहानियो की विभिन्न भारतीय भाषाओ के साथ साथ अंग्रेजी, पोलिश तथा रुसी भाषाओ में अनुवाद हो चुका है। शेखर जोशी की लिखी प्रख्यात कहानी ‘दाज्यु’ पर बाल चित्र समिति द्वारा फिल्म निर्माण भी किया जा चुका है।

 

 

 

 

शेखर जोशी ने कहानी रचना संसार के माध्यम से समकालीन जनजीवन बहुविधि बिडंबनाओं को अहसास कराने में पूर्णरूप से सफलता प्राप्त किया है। इस कार्य के लिए शेखर जोशी की प्रगतिशील जीवन दृष्टि के साथ ही यथार्थ बोध का महत्वपूर्ण योगदान है।

 

 

 

 

शेखर जोशी एक किसान परिवार से संबद्ध थे। शेखर जोशी का जन्म संयुक्त उत्तर प्रदेश के अल्मोड़ा जिले के ओलिया गांव में 10 सितंबर 1932 को एक किसान परिवार में हुआ था (अल्मोड़ा जिला वर्तमान में उत्तराखंड में स्थित है) शेखर जोशी की शिक्षा देहरादून के साथ ही अजमेर से सम्पन्न हुई।

 

 

 

 

शेखर जोशी की इंटरमीडिएट की शिक्षा के दौरान ही आई.एम.ए. के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थान के लिए चयनित किया गया था। शेखर जोशी ने आई.एम.ए. रक्षा संस्थान मे 1986 तक अपनी सेवा प्रदान करते रहे तथा स्वैच्छिक रूप से आई.एम.ए. जैसी प्रतिष्ठित संस्थान से त्यागपत्र देते हुए अपनी लेखन कला पर पूर्ण रूप से ध्यान केंद्रित किया।

 

 

 

 

शेखर जोशी के लेख विषय पर फिल्म का निर्माण किया गया है। शेखर जोशी ने अपनी कहानियो को माध्यम बनाकर ‘नयी कहानी आंदोलन’ का सफल प्रतिनिधित्व किया था। शेखर जोशी की रचना कृतियों का अंदाज औरो से अलग होता था जो अपने अनोखे अंदाज के लिए प्रख्यात थी।

 

 

 

 

शेखर जोशी की लिखी कहानियां और उपन्यासों को पाठक समूह दवार बहुत प्रसंसा किया गया। शेखर जोशी की कुछ लोकप्रिय कहानियो के नाम यथा साथ के लोग, हलवाहा, नौरंगी बीमार है (कहानी संग्रह) दाज्यु इत्यादि है। शेखर जोशी ने ‘प्रतिनिधि कहानियां’ को अंतिम बार लिखा था। इस बहुमुखी लेखक ने 4 अक्टूबर 2022 को इस नश्वर संसार से अनंत की यात्रा पर निकल गए।

 

 

 

 

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