आचार्य प्रमोद कृष्णम जीवनी | Pramod Krishnam Biography Hindi

आज हम आपको आचार्य श्री प्रमोद कृष्णम की जीवनी के बारे में बताने जा रहे हैं, आप उनके बारे में पूरी डिटेल जानकारी नीचे पा सकते हैं, आप आचार्य जी के बारे में जानने के लिए पूरा आर्टिकल अवश्य ही पढ़ें।

 

 

 

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भारतीय राजनीति के चर्चित नेता के रूप में प्रमोद कृष्णम की पहचान है। इन्होने उत्तर प्रदेश के संभल में कल्कि पीठ धाम की स्थापना की है। इन्हे कल्कि पीठाधीश्वर के रूप में जाना जाता है। प्रमोद कृष्णम का जन्म बिहार राज्य के एक ब्राह्मण परिवार में 4 जनवरी 1965 को हुआ था।

 

 

 

 

प्रमोद कृष्णम ने अपने जीवन में राजनीति के साथ ही अध्यात्म का अच्छा ताल मेल बना रखा है। इन्होने राजनीति विज्ञान की शिक्षा प्राप्त किया है। प्रमोद कृष्णम अपने पेशेवर जीवन में राजनीति को महत्व देते है तथा इनके निजी जीवन में आध्यात्मिकता का प्रवाह है।

 

 

 

 

कल्कि धाम पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम की ख्याति आचार्य प्रमोद कृष्णम के रूप में है। आचार्य प्रमोद कृष्णम का जीवन भगवान कल्कि को समर्पित है। इन्होने उत्तर प्रदेश के संभल में 1990 में कल्कि फाउंडेशन की स्थापना के साथ ही 1996 में कल्कि धाम की स्थापना किया।

 

 

 

 

वर्तमान समय में भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के कर कमलो द्वारा 19 फरवरी 2024 को कल्कि मंदिर की आधारशिला की नीव पड़ी। आचार्य प्रमोद कृष्णम अपने बचपन से ही वेद पुराण मे रूचि रखते थे तथा भगवान कल्कि को अपना आराध्य देव मानते है।

 

 

 

 

पौराणिक कथाओ के उल्लेख के अनुसार जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु के दस अवतारों में से अंतिम अवतार भगवान कल्कि का है जो आचार्य प्रमोद कृष्णम के आराध्य है। वर्तमान समय में आचार्य प्रमोद कृष्णम का यह वाक्य ‘राम और राष्ट्र के साथ समझौता नहीं किया जा सकता’ चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

 

 

 

इसी ध्येय वाक्य के कारण ही इन्होने कांग्रेस पार्टी के साथ अपने 40 वर्ष के संबंध को समाप्त कर दिया है। इस प्रकार आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 16 – 17 वर्ष की उम्र में राजीव गांधी को दिए गए इस वचन को ‘वह आजीवन कांग्रेस के साथ रहेंगे’ को तोड़ दिया और कांग्रेस पार्टी से विदाई के लिए कांग्रेस पार्टी को दोष देते हुए कहते है।

 

 

 

 

मैंने कांग्रेस पार्टी को नहीं छोड़ा है बल्कि कांग्रेस पार्टी ने ही उन्हें छोड़ दिया है। अपनी सफेद लहराती दाढ़ी, सफेद वस्त्रो के बीच ललाट पर लाल तिलक के द्वारा प्रमोद कृष्णम पूर्ण रूप से हिन्दू संत से अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे है।

 

 

 

 

हिन्दू संतो के प्रतीक ‘भगवा वस्त्र’ के मध्य प्रमोद कृष्णम के वस्त्रो का सफेद रंग उनकी विचारधारा और अध्यात्म को अलग परिभाषित करता है जिसे उनका अतीत भी कांग्रेस से जुड़ा हुआ परिलक्षित होता है परन्तु वर्तमान में आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेसी परिवेश से मुक्त हो चुके है।

 

 

 

 

उत्तर प्रदेश के संभल स्थित कल्कि धाम के कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम वर्तमान समय में सबकी चर्चा का केंद्र बने हुए है। आचार्य प्रमोद कृष्णम धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही गजल, शायरी और मुशायरो में अपनी महत्वपूर्ण स्थिति दर्ज कराते है।

 

 

 

 

प्रमोद कृष्णम के जीवन मे राजनीति के साथ अध्यात्म का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रमोद कृष्णम मात्र 17 वर्ष की उम्र में राजीव गांधी के समक्ष आजीवन कांग्रेस की वफ़ादारी की घोषणा की थी परन्तु वर्तमान समय में भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आचार्य प्रमोद कृष्णम के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए संभल के कल्कि धाम पहुंचकर ‘कल्कि धाम मंदिर’ की आधारशिला रखने का कार्य सम्पन्न किया।

 

 

 

 

आचार्य प्रमोद कृष्णम अपनी धर्म की आस्था को आगे बढ़ाते हुए सनातन धर्म के साथ ही इस्लाम पर अपनी गहरी पकड़ का उल्लेख करते है। आचार्य प्रमोद कृष्णम किसी मौलाना से अच्छा कर्बला की लड़ाई की व्याख्या करने में समर्थ है। प्रमोद कृष्णम शायरी का हुनर रखते है।

 

 

 

 

यही कारण है कि इनके जलसो में नवी और अली के नारे बुलंद होते रहते है। वर्ष 2019 के लोकसभा के चुनाव में लखनऊ संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर प्रमोद कृष्णम भाजपा के राजनाथ सिंह के प्रमुख प्रतिद्वंदी थे। उन्होंने एक साक्षात्कार में हिन्दू धर्म के बंधन से इंकार किया था।

 

 

 

 

फिर प्रमोद कृष्णम ने कहा था मैं भजन और शायरी भी लिखता हूँ मुझे धार्मिक कार्यक्रमों और मुशायरो में शामिल होने का अभिमान है और मेरा एकमात्र धर्म ‘शांति’ है जो कोई भी व्यक्ति शांति में व्यवधान पैदा करता है वह मेरा प्रतिद्वंदी है।

 

 

 

 

वर्ष 2018 के समय में भारतीय साधु संतो का समूह ‘अखाड़ा परिषद’ ने प्रमोद कृष्णम को फर्जी बाबा बताकर साधु संतो के समूह से बाहर करा दिया था क्योंकि संत समूह के अनुसार प्रमोद कृष्णम ने संत परंपरा का अनुपालन नहीं किया था और पारिवारिक रिश्तो से बंधे हुए थे।

 

 

 

 

संत समूह के अनुसार वास्तविक संत परिवार का परित्याग कर देते है। इस बात का उत्तर देते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा था मुझे किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है मुझे भली भांति पता है मैं क्या कर रहा हूँ मैं अपने मार्ग पर अनवरत चलता रहूंगा।

 

 

 

 

किसान आंदोलन पार्ट 1, 2019 का चुनाव, कोरोना काल में मोदी सरकार की आलोचना करने वाले प्रमोद कृष्णम ने वर्तमान समय में अपने रुख में परिवर्तन कर लिया है तथा ‘राम और राष्ट्र’ के प्रति समर्पित हो चुके है। एक समय ऐसा भी था जब बंगाल विधान सभा चुनाव के समय बोला था कि ‘यदि ममता बनर्जी का समर्थन नहीं किया गया तो नरेंद्र मोदी को हराना मुश्किल हो जायेगा।’

 

 

 

 

वर्तमान समय प्रमोद कृष्णम ने उद्घोष किया है कि वह आजीवन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े रहेंगे। वर्ष 2019 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को भाजपा के दिग्गज ने राजनाथ सिंह के विरुद्ध मैदान में उतार दिया था।

 

 

 

 

तीसरे प्रतिद्वंदी के रूप में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार के रूप में पूर्व भाजपा मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा भी मैदान में थी परन्तु राजनाथ सिंह को विजय श्री ने वरण किया। प्रमोद कृष्णम 1.80 हजार मतों के साथ तीसरे स्थान पर थे।

 

 

 

 

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दो बार (2014 – 2019) में कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनव लड़ा था परन्तु कुछ महीने से, कांग्रेस का धारा 370 का विरोध करना, तीन तलाक कानून का विरोध करना, प्रमोद कृष्णम को रास नहीं आया फिर भी प्रमोद कृष्णम अपमानित होते हुए भी कांग्रेस में बने रहे।

 

 

 

 

प्रमोद कृष्णम कभी प्रियंका गांधी के करीबी नेताओ में शामिल थे। उनका दावा है कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है खुद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें छोड़ी है। प्रमोद कृष्णम के अनुसार वर्ष 1981 – 82 में इन्होने राजीव गांधी से मिलकर वादा किया था कि आजीवन कांग्रेस पार्टी से संबद्ध रहेंगे।

 

 

 

 

जब राजीव गांधी अपने भाई संजय गांधी के निधन के बाद सांसद बने थे तब राजेश पायलट ने प्रमोद कृष्णम की मुलाकात राजीव गांधी से करायी थी। इंदिरा गांधी तब प्रधानमंत्री के तौर पर मौजूद थी। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बन गए थे।

 

 

 

 

तब प्रमोद कृष्णम ने उनसे वादा किया था कि आजीवन कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित रहेंगे परन्तु प्रमोद कृष्णम का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के पास कुछ ऐसे लोगो का जमावड़ा है जो हिंदुत्व के विरुद्ध अनर्गल बयानबाजी को ही राजनीति समझते है।

 

 

 

 

इसी क्रम में प्रमोद कृष्णम ने डी. एम. के. के नेता उदयनिधि स्टालिन का उदाहरण दिया जिन्होंने कुछ दिन पहले अपने बयान में सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया बताया था। प्रमोद कृष्णम का मानना है कि कांग्रेस के पतन का कारण तुष्टिकरण की नीति है।

 

 

 

 

प्रमोद कृष्णम के अनुसार जो लोग यह कहते है कि पूजा करता हूँ प्रेम नहीं करता वह लोग सरासर झूठ बोलते है। आचार्य प्रमोद कृष्णम एक गजल से शेर सुनाते हुए कहते है वो शख्स जो किसी से प्रेम नहीं करता, धोखा है इबादत का, इबादत नहीं करता।

 

 

 

 

प्रमोद कृष्णम के यूट्यूब मुशायरे का अवलोकन करने पर ज्ञात होता है कि इनके मुशायरे मुस्लिम समाज में बुलंदियों पर थे। आशा किया जा सकता है कि अपनी बदलती हुई वफादारियों के बीच प्रमोद कृष्णम का गजल गायकी और मुशायरो का दौर जारी रहेगा।

 

 

 

हमें उम्मीद है कि यह आर्टिकल आपको निश्चित ही पसंद आया होगा और ऐसी ही जानकारी के लिए इस ब्लॉग से जुड़े रहें और इसके आर्टिकल्स को पढ़ते रहे।

 

 

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