विराट कोहली की जीवनी Pdf | Virat Kohli Biography in Hindi Pdf

हेलो दोस्तों, आशा है आप सभी लोग एकदम मस्त होंगे। आज हम आपको Virat Kohli Biography in Hindi PDF देने जा रहे हैं। आप लोग विराट कोहली के जबरा फैन होंगे तो उनके बारे में जानना भी चाहते होंगे तो चलिए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

 

 

 

 

Virat Kohli Biography in Hindi

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भारतीय क्रिकेट टीम में विराट कोहली एक चर्चित चेहरा है जिन्होंने क्रिकेट के अपने प्रारंभिक दिनों से लेकर वर्तमान समय तक क्रिकेट के खेल में अनेक उपलब्धियां हासिल कर ऊंचाई पर पहुंचे है विराट कोहली क्रिकेट के बहुत प्रसिद्ध खिलाड़ी है। इनका संबंध पंजाबी समुदाय से है विराट कोहली का जन्म दिल्ली के एक मध्यवर्गीय पंजाबी परिवार में 5 1988 को हुआ था।

 

 

 

 

 

इनके पिता का प्रेम कोहली था जो एक प्रख्यात वकील थे। विराट कोहली की माता का नाम सरोज कोहली है। विराट कोहली के बड़े भाई का नाम विकास कोहली है तथा बड़ी बहन का नाम भावना है। विराट कोहली के पारिवारिक सदस्यों के अनुसार जब विराट तीन वर्ष का था तभी अपने हाथ में क्रिकेट बैट लेकर अपने पिता प्रेम कोहली को बॉलिंग करने के लिए कहा था जो विराट के सुनहरे भविष्य का संकेत था।

 

 

 

 

 

विराट कोहली की आरंभिक शिक्षा दिल्ली के विशाल भारती पब्लिक स्कूल से हुई। पश्चिमी दिल्ली क्षेत्र में जब 1988 में दिल्ली क्रिकेट का अकादमी का निर्माण हुआ तब मात्र नौ वर्ष की अवस्था में ही इनके पिता ने अपने पड़ोसियों के राय से विराट कोहली को दिल्ली के क्रिकेट अकादमी में प्रवेश दिलाया। विराट कोहली के पिता प्रेम कोहली के साथ ही उनके पड़ोसियों ने भी विराट कोहली की क्रिकेट प्रतिभा का आंकलन कर लिया था।

 

 

 

 

 

प्रेम कोहली के पड़ोसियों ने कहा विराट कोहली को गली क्रिकेट में व्यर्थ ही अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि व्यावसायिक रूप से किसी अकादमी में क्रिकेट का प्रशिक्षण लेना चाहिए। इस प्रकार से विराट कोहली की आगे की क्रिकेट राह आसान हो गयी। विराट कोहली ने राजकुमार शर्मा के नेतृत्व में क्रिकेट की बारीकियां सीखी तथा सुमित डोगरा अकादमी में क्रिकेट मैच खेलते हुए अभ्यास किया।

 

 

 

 

 

विराट कोहली को कक्षा 9 की शिक्षा के लिए सविएर कान्वेंट स्कूल में दाखिला दिलाया गया। वहां शिक्षा के साथ ही क्रिकेट प्रशिक्षण में भी सहायता मिलती थी। क्रिकेट खेल के साथ ही विराट कोहली शिक्षा में भी मेधावी छात्र थे। विराट के शिक्षक भी इन्हे एक होनहार विद्यार्थी मानते थे। शनैः शनैः विराट कोहली का क्रिकेट खेल परवान चढ़ता गया। विराट कोहली को वर्ष 2004 में विजय मर्चेंट ट्राफी खेलने के लिए दिल्ली अंडर 17 टीम का सदस्य बनाया गया।

 

 

 

 

 

विराट कोहली इस चार मैचों की सीरीज में 450 रनो से अधिक का योगदान दिया था तथा एक मैच में विराट कोहली ने अविजित 251 रन बनाये थे। अपने इस प्रभावपूर्ण प्रदर्शन के कारण इन्हे अगले वर्ष पुनः विजय मर्चेंट ट्राफी के लिए चुना गया जिसमे विराट कोहली ने 7 मैचों में 757 रन बनाने के साथ ही सर्वाधिक रन बनाने का कीर्तिमान अपने नाम किया था।

 

 

 

 

 

विजय मर्चेंट ट्राफी में विराट कोहली ने दो शतकों के साथ ही 84.11 की औसत से रन बनाया था। वर्ष 2006 की जुलाई में विराट कोहली को इंग्लैण्ड में क्रिकेट खेलने के लिए अंडर 19 के खिलाड़ी के रूप में पहली बार विदेश दौरा करने का अवसर मिला। इंग्लैण्ड के अपने पहले दौर में ही तीन एकदिवसीय मैचों में विराट कोहली ने 105 रनो का योगदान दिया था।

 

 

 

 

 

इंग्लैण्ड के इस दौर में ही तीन टेस्ट मैचों में विराट कोहली ने 49 के औसत से रन बनाये थे जिनमे वर्ष 2006 की एकदिवसीय और टेस्ट सीरीज में विजय हासिल किया था। वर्ष 2006 में ही विराट कोहली पकिस्तान की अंडर 19 टीम के खिलाफ भी बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। विराट की प्रतिभा का आंकलन करने के बाद इन्हे अंडर 19 क्रिकेट का स्थाई सदस्य बना दिया गया।

 

 

 

 

वह दिन बहुत मनहूस था जब 18 दिसंबर 2006 को ब्रेन स्ट्रोक की वजह से प्रेम कोहली की मृत्यु हो गयी। विराट कोहली के सर से पिता का साया उठ गया जिसे बयान करते हुए विराट कोहली ने कहा है मैंने अपने जीवन में बहुत कुछ देखा है युवा दिनों में ही हमारे पिता का साथ छूट गया। पारिवारिक आर्थिक स्थिति डगमग हो गयी हम लोगो को किराये के रूम में गुजरा करना पड़ा था जो एक भयानक सदमे से कम नहीं था।

 

 

 

 

 

अपने पिता की मृत्यु के पश्चात विराट कोहली को उस समय सुर्खी मिली जब वह मैच में दिल्ली के कर्नाटक के खिलाफ खेल रहे थे। 2008 में मलेशिया में अंडर 19 क्रिकेट का आयोजन किया गया था तब विराट कोहली भारत की अंडर 19 क्रिकेट टीम का नेतृत्व कर रहे थे। उस मैच में चार नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए कोहली ने 6 मैचों में 47 की औसत से 335 रन बनाने में सफल हुए थे।

 

 

 

 

पूरे टूर्नामेंट में रणनीतिक रूप से गेंदबाजी परिवर्तन करने के लिए विराट कोहली की प्रशंसा की गयी जो उनकी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। विराट कोहली प्रत्येक मैच का गंभीरता के साथ नेतृत्व करते है। ऑस्ट्रेलिया में आयोजित 2009 में इमर्जिंग प्लेयर्स टूर्नामेंट में भारत की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था। फाइनल मैच में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध विराट कोहली ने अपने बल्ले से कारनामा करते हुए शतक बना दिया था जिसमे भारत को 17 रनो से विजय प्राप्त हुई थी।

 

 

 

 

विराट कोहली की शानदार प्रतिभा को देखते हुए वर्ष 2014 में धोनी के टेस्ट मैच से सन्यास लेने के उपरांत विराट कोहली को भारतीय टेस्ट टीम की कमान सौपी गयी। विराट कोहली के क्रिकेट खेल की महानता का इस बात से पता लगता है कि इन्होने एकदिवसीय क्रिकेट खेल में सबसे तेज गति से 5000 रन बनाने का रिकॉर्ड स्थापित किया है। विराट कोहली को चार वर्ष में 1000 रन से अधिक एकदिवसीय मैचों में रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी का श्रेय प्राप्त है।

 

 

 

 

 

वर्ष 2015 में T-20 मैच में सबसे तेज 1000 रन बनाने का श्रेय भी विराट कोहली को ही मिला है। विराट कोहली ने अनेको पुरस्कार प्राप्त किए है। इन्हे वर्ष 2012 में आई. सी.सी. ओ. डी. आई. प्लेयर ऑफ़ द ईयर चुना गया था। विराट कोहली मध्यक्रम के बल्लेबाज के साथ ही दाए हाथ से मध्यगति से गेंदबाजी के लिए भी जाने जाते है। विराट कोहली प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए दिल्ली क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करते है तथा प्रसिद्ध इंडियन प्रीमियर लीग (आई.पी.एल.) में रॉयल चैलेंजर बंगलुरु के कप्तान है।

 

 

 

 

इन्होने अपने क्रिकेट जीवन में दिल्ली क्रिकेट अकादमी के लिए भी क्रिकेट खेला है। विराट कोहली के नाम एक भारतीय बल्लेबाज के रूप में सबसे तेज शतक बनाने का कीर्तिमान भी है। वर्ष 2008 में विराट कोहली ने एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जीवन का आरंभ किया तथा वर्ष 2011 में विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम के महत्वपूर्ण सदस्य थे। नियमित रूप से एकदिवसीय क्रिकेट खेलने के बाद भी विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के विरुद्ध किंग्सटन में वर्ष 2011 में पहला टेस्ट मैच खेला था।

 

 

 

 

इन्हे वर्ष 2012 में आई.सी.सी. प्लेयर के लिए चयनित किया गया था। विराट कोहली को पहली बार वर्ष 2013 में एकदिवसीय मैचों में शीर्ष बल्लेबाज के रूप में स्थान मिला था। विराट कोहली ने अपने संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए कहा कि पिताजी की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर हो गयी थी जिस कारण से हमे अपने पारिवार सदस्यों के साथ किराये के घर में शरण लेनी पड़ी थी।

 

 

 

 

 

वर्ष 2006 में जब विराट कोहली के पिता की मृत्यु का समाचार मिला उस समय विराट कोहली कर्नाटक के विरुद्ध दिल्ली टीम का रणजी ट्राफी के लिए नेतृत्व कर रहे थे लेकिन विराट कोहली ने खेल पूर्ण करने को परीयता दिया फिर अपने घर के लिए प्रस्थान किया जो इनकी दृढ इच्छाशक्ति को दर्शाने के लिए पर्याप्त है।

 

 

 

 

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